लालू के दोनों लाल तेजस्वी-तेजप्रताप में तकरार बरकरार!

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दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में चल रही लैंड फॉर जॉब मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त माहौल अचानक सियासी चर्चा से ज्यादा पारिवारिक संकेतों की तरफ मुड़ गया, जब वहां एक ही जगह पर मौजूद दो भाई तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव एक-दूसरे के सामने तो आए, लेकिन *नज़रें मिलीं, शब्द नहीं। दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं हुई, कोई औपचारिक अभिवादन भी नहीं दिखा। यह खामोश मुलाकात वहां मौजूद वकीलों, पत्रकारों और राजनीतिक हलकों के लिए सवालों से भरी एक तस्वीर बन गई, जिसने कोर्ट रूम से ज्यादा बाहर सियासी गलियारों में चर्चा छेड़ दी।

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दरअसल, लैंड फॉर जॉब मामले में शुक्रवार को दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट में अहम सुनवाई होनी थी, जहां आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके पूरे परिवार पर आरोप तय किए जाने थे। इसी सुनवाई में शामिल होने के लिए लालू-राबड़ी के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव भी कोर्ट पहुंचे। कोर्ट रूम तक पहुंचने के दौरान एक दिलचस्प और चर्चा में आने वाला दृश्य उस वक्त सामने आया, जब इत्तेफाक से दोनों भाई एक ही लिफ्ट में सवार होकर ऊपर के फ्लोर की ओर जा रहे थे।

लिफ्ट में तेजस्वी और तेजप्रताप एक साथ मौजूद थे। दोनों ने एक-दूसरे की ओर तिरछी नजरों से देखा जरूर, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उनके बीच एक शब्द की भी बातचीत नहीं हुई। लिफ्ट में मौजूद लोगों के मुताबिक, दोनों भाइयों के बीच न तो हालचाल पूछे गए और न ही प्रणाम-नमस्ते जैसी कोई औपचारिकता निभाई गई। पूरे समय माहौल बेहद खामोश रहा। कोर्ट परिसर में भी तेजप्रताप यादव अपने भाई-बहनों से दूरी बनाए हुए नजर आए। फैसले के बाद तेजस्वी यादव, मीसा भारती के साथ उनके आवास चले गए। आंख के ऑपरेशन के बाद लालू प्रसाद यादव भी फिलहाल मीसा भारती के आवास पर ही रह रहे हैं।

इधर, शुक्रवार को दिल्ली की अदालत ने CBI की ओर से दर्ज कथित नौकरी के बदले जमीन घोटाले के मामले में बड़ा फैसला सुनाया। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी प्रसाद यादव समेत 41 आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने कहा कि यादव परिवार ने एक क्रिमिनल सिंडिकेट की तरह काम किया और पूरे मामले में एक बड़ी साजिश रची गई।

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कोर्ट के मुताबिक, CBI की चार्जशीट से यह भी सामने आया है कि लालू यादव के करीबी सहयोगियों ने साजिशकर्ताओं के रूप में उनकी मदद की। अदालत ने यादव परिवार की ओर से दाखिल डिस्चार्ज याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। कुल 98 आरोपियों में से 52 को बरी किया गया है, जिनमें कुछ CPO भी शामिल हैं, जबकि 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं।